प्रदेश में संचालित अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को एक छतरी के नीचे लाने के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है।
अब राज्य में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन व पारसी समुदायों द्वारा स्थापित शैक्षिक संस्थान इस प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। एक जुलाई को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही बोर्ड के अधीन संचालित 452 मदरसे भी इसी प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे मुस्लिम समेत सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। साथ ही मुस्लिम समुदाय के मदरसों में पढऩे वाले बच्चे भी अब आइएएस, पीसीएस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होगे और वे प्रदेश, देश व परिवार का नाम रोशन करेंगे।
सरकार ने तीन फरवरी को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कासमी ने कहा कि सभी वर्ग, समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, प्रधानमंत्री मोदी के इस मिशन को राज्य में मुख्यमंत्री धामी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक राज्य में मदरसा बोर्ड से मुस्लिम समुदाय के बच्चों को ही फायदा होता था। अब मुस्लिम समेत सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थान राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। इससे सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों का कल्याण होगा और उन्हें गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को हमेशा वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया और उनके कल्याण के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री धामी ने दिखाया है कि वह वास्तव में उनके साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों के प्राधिकरण के दायरे में वहां पढऩे वाले ब’चों को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने का मौका मिलेगा। साथ ही धार्मिक शिक्षा पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी का आभार जताते हुए कहा कि वह तुष्टीकरण के लिए नहीं, बल्कि संतुष्टीकरण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने नवगठित प्राधिकरण के अध्यक्ष समेत सदस्यों को शुभकामनाएं भी दी हैं।